जयपुर। सोमवार को गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी पर उपजोंन जयपुर की संगोष्टी सम्पन्न हुई जिसमें जयपुर ग्रेटर, जयपुर हेरिटेज, जयपुर ग्रामीण, सीकर, दौसा, टोंक के करीब 175 कार्यकर्ताओं ने खराब मौसम के बावजूद भाग लिया। मीटिंग मे विभिन्न तहसीलो से भी कार्यकर्ताओं ने अच्छी संख्या में भाग लिया । गोष्टी को राजस्थान जोन प्रभारी ओम प्रकाश अग्रवाल, प्रान्तीय ट्रस्टी डॉ प्रशांत भारद्वाज, सतीश भाटी, प्रान्तीय समिति सदस्य एवं रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक अधिकारी व पूर्व डायरेक्टर DLB दीपक नंदी, वरिष्ठ कार्यकर्ता रविंद्र पालीवाल, पुष्कर कार्यक्रम प्रभारी श्याम सिंह, उपजोंन समन्वयक सुशील कुमार शर्मा, जिला समन्वयक रूप नारायण ममोडिया, वरिष्ठ कार्यकर्ता गायत्री कचोलिया, चौमूं तहसील के गायत्री परिवार ट्रस्ट से राजकुमार शर्मा ,सावरमल अग्रवाल, एडवोकेट जितेंद्र सिंह बिजावत, मालचंद बुनकर राजेंद्र सेन, रामसिंह दादरवाल , नाथूलाल जाट एवम परिव्राजक रमेश राजपाल आदि कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी आंदोलन के राजस्थान प्रभारी डॉ राधेश्याम
श्रोत्रिय, सहायक व्यवस्थापक मणि शंकर ने संबोधित किया।
इस दौरान गायत्री परिवार ट्रस्ट चौमूं के सचिव राजकुमार शर्मा ने प्रज्ञापीठ द्वारा चल रही मिशन की गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला।जिसमे बताया गया की शांतिकुंज हरिद्वार के लिए इस वर्ष भी गेंहू का ट्रक पूरे प्रयास के साथ रवाना किया जायेगा। अंत में व्यवस्थापक श्री सोहन लाल जी शर्मा ने सभी आगंतुकों को इतनी वर्षा के बावजूद कार्यक्रम में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाने के लिये आभार प्रकट किया। संगोष्टी में निम्न निर्णय लिये गये।
1 पुष्कर में आयोजित होने वाली 15 -16 जुलाई की कार्यशाला से पूर्व पिछली 12-13 मार्च 22 को आयोजित की गयी कार्यशाला में लिये लिये गये निर्णयों की अनुपालना की जाये।
2 .प्रस्तावित गोष्टि से पूर्व जिला समन्वय समिति का गठन किया जाए, तहसील समन्वयको /तहसील समन्वय समिति का गठन किया जाए।
3.ट्रस्टों के पुनर्गठन का कार्य शीघ्र पूरा किया जाए।
4 गोष्टि में ऑनलाइन समयदान फार्म का काउंटर लगाया गया जिसमें 35 परिजनों ने ऑनलाइन समयदान के फार्म स्पॉट पर भरे। उल्लेखनीय है कि अभी तक 209 ऑनलाइन समयदान के फार्म प्राप्त हो चुके हैं।शेष बच रहे परिजनों से भी आग्रह है कि वे ऑनलाइन समयदान का फार्म शीघ्र भेजे।
5.प्रत्येक माह की पूर्णिमा पर ऑनलाइन यज्ञ होगा इससे सभी नये परिजनों, विशेषकर गांवों के लोगो को जोड़ा जाए।
6.वर्षा में वृक्षारोपण अभियान चलाया जाये।
अंत मे शांतिपाठ के साथ संगोष्टी का समापन हुआ।