रेनवाल।अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर समाज में नारी की महत्ता पर आज डा. अनिता कुमावत ने अपने विचार रखे।अभी हाल ही में डाॅक्टरेट की उपाधि से सम्मानित हुई डा. अनिता कुमावत ने अपने विशेष साक्षात्कार में बताया कि वैदिक काल से ही नारी को पूज्यनीय माना जाता रहा है।
वर्तमान में भारतीय नारी ने अपने आप को न केवल पारिवारिक स्तर पर अपितु सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी सक्षम बनाते हुए संघर्ष रूपी तूफ़ानों का सामना करते हुए विजय श्री का वरण किया है। समाज में एक पारिवारिक स्तंभ के रूप में नारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समाज में नर और नारी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हम प्रतिवर्ष आठ मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं।
परन्तु वर्तमान में नारी की यथार्थ सिथती इस दिवस के महत्व पर प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।नारी के साथ बढ़ती जा रही आपराधिक प्रवृत्तियां ने उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाई है। यह आज विचार का बिन्दु है। वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में नारी को पुरुष समान अधिकार प्राप्त है परन्तु यह भी उसे प्राप्त करने केलिए जूझना पड़ रहा है। आज चाहे हमारा ग्रामीण क्षैत्र हो या फिर शहरी परिवेश सभी जगह उसे अशिक्षा, उत्पीडन, दैहिक शोषण, अन्याय एवं अत्याचार जैसी कई दुष्प्रवृत्तीयो का सामना करना पड़ रहा है।
इन सब के लिए जिम्मेदार कौन है?यह प्रश्न आज भी समाज में बरकरार है।हम इसके लिए पुरूष को दोषी ठहरा कर समस्या को नजरंदाज नहीं कर सकते हैं। हमें उसकी सम्मान जनक स्थिति एवं शोषण मुक्त जीवन उसे प्रदान करना होगा जिससे वह सही अर्थों में प्रगति कर सके।तभी हमारा अंतरास्ट्रीय दिवस मनाना सार्थक होगा। (विष्णु जाखोटिया की रिपोर्ट)